खाटू श्याम मंदिर, राजस्थान संपूर्ण गाइड

इन दिनों इंस्टाग्राम पर खाटू श्याम जी की रील खूब वायरल हो रही है, जिसे देखने के बाद लोग वहां जाने के बारे में सोचते हैं, लेकिन क्या आपके पास उस रील में खाटू श्याम जी से जुड़ी सारी जानकारी है, अगर नहीं तो कोई बात नहीं, क्योंकि वह वीडियो सिर्फ मनोरंजन के लिए है।

आज इस लेख में हम शीश दानी, हारे के सहारे खाटू बाबा हमारे के बारे में जानने जा रहे हैं कि खाटू बाबा कौन थे, उन्हें शीश दानी क्यों कहा जाता है और उनका नाम श्याम के नाम से अलग क्यों है, इसलिए आज का लेख को अंत तक पढ़ें, जिसे आपके सभी संदेह दूर हो जाएंगे।

कौन हैं बाबा खाटू श्याम?

 खाटू श्याम
खाटू श्याम credit- Sumit Saraswat

खाटू श्याम असल में भीम और हिडिम्बा के पोते और घटोत्कच के बेटे बर्बरीक थे।  बर्बरीक को ही आज के समय पर खाटू श्याम, शीश दानी और कृष्ण अवतार के नाम से जाना जाता है। बर्बरी का नाम उनकी मां ने उनके घुंघराले बालों के कारण रखा था और वह बचपन से ही बहुत शक्तिशाली थे।

बर्बरीक से खाटू श्याम के नाम का रहस्य

खाटू श्याम को भगवान श्री कृष्ण का अवतार माना जाता है क्योंकि जब महाभारत हुआ था तो खाटू श्याम ने अपना शीश भगवान को समर्पित कर दिया था, तब भगवान कृष्ण ने उनके गांव का नाम खाटू और अपना नाम श्याम जोड़कर खाटू श्याम नाम दिया और कहा- तुम कलियुग में मेरे नाम से पूजा जाएगा।

खाटू श्याम का रहस्य क्या है?

खाटू श्याम द्वार
खाटू श्याम द्वार credit: rajasthanholidays.co.in

दरअसल, श्री श्याम बाबा की कहानी महाभारत से शुरू होती है जब कौरवों और पांडवों के बीच युद्ध होना तय हुआ, तब बर्बरीक ने भी युद्ध में शामिल होने की इच्छा व्यक्त की, इसलिए युद्ध के मैदान में जाने से पहले वह अपनी मां के पास आशीर्वाद लेने गए। उन्होंने अपनी मां को वचन दिया कि वह उन लोगों की ओर से युद्ध लड़ेंगे जो कमजोर हैं या जो हार रहे हैं वो उनका साथ देंगे। इसके बाद, उन्होंने अपने नीले घोड़े पर तीन बार सवार होकर धनुष के साथ कुरुक्षेत्र के रंगमंच की ओर प्रस्थान किया। लेकिन जैसे ही श्री कृष्ण जी को इस बात का पता चला तो वह परेशान हो गए क्योंकि वह जानते थे कि खाटू श्याम बहुत शक्तिशाली थे।

तब श्री कृष्ण एक ब्राह्मण का रूप धारण करके बर्बरीक जी के सामने प्रकट हुए और उनसे कहने लगे कि मात्र तीन तीरों से वह युद्ध में कैसे लड़ सकते हैं। यह सुनकर बर्बरीक ने उत्तर दिया कि एक बाण ही शत्रु सेना को हराने के लिए पर्याप्त है और यदि तीन बाणों का उपयोग किया जाए तो यह पूरे ब्रह्मांड को नष्ट कर सकता हूं। यह जानकर ब्राह्मण रूपेश श्री कृष्ण ने उन्हें एक ही तीर से इस पेड़ के सभी पत्ते गिराने की चुनौती दी और कृष्ण जी ने पेड़ का एक पत्ता अपने पैर के नीचे दबा लिया।

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तो बर्बरीक ने एक क्षण में पेड़ के सारे पत्ते जमीन पर गिरा दिये और एक पत्ता कृष्ण जी के पैर के नीचे था। बर्बरीक का बाण उधर चल रहा था, तब बर्बरीक ने कहा, ब्राह्मण कृपया अपना पैर हटा लो अन्यथा यह बाण आपके पैरो को भी नष्ट कर देगा।

तब कृष्ण जी ने अपना पैर पत्ते के ऊपर से हटा दिया और बर्बरीक से पूछा कि तुम किस पक्ष से युद्ध करने आये हो? बर्बरीक ने कहा कि मैं माँ को वचन देकर आया हूँ कि जो भी पक्ष हारेगा, मैं उस पक्ष के साथ खड़ा रहूँगा। ये सुनकर कृष्ण जी. बर्बरीक से कहा कि मैं एक ब्राह्मण हूं और अगर मैं तुमसे कुछ भी मांगूंगा तो तुम मुझे दान दोगे, तब बर्बरीक ने कहा, मैं तुम्हें वचन देता हूं कि आप मुझसे जो भी मांगोगे, मैं आपको अवश्य दूंगा, तब भगवान श्री कृष्ण ने बर्बरीक का सिर दान मांगा। बर्बरीक ने बिना कुछ सोचे अपनी बात रखी और सिर श्री कृष्ण को दे दिया और फिर उसका सिर वहीं सबसे बड़े पेड़ पर रख दिया, जहाँ से वह पूरा युद्ध देख सकता था। इसी समय भगवान श्रीकृष्ण ने इन्हें खाटू श्याम नाम दिया।

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खाटू श्याम में श्याम कुंड क्या है?

श्याम कुंड
श्याम कुंड credit-khatushyambaba.com

दरअसल, पानीपत के चुलकाना धाम में भगवान श्री कृष्ण ने खाटू श्याम से उनका शीश मांग लिया था.फिर वहां से खाटू श्याम का शीश पानी में बहकर राजस्थान आ गया। जब वहां के राजा ने खाटू श्याम का शीश देखा, तब वहां के राजा ने उनके शीश वाले स्थान पर खाटू श्याम मंदिर बनवाया, और आज भी खाटू श्याम मंदिर में वह कुंड है जो खाटू कुंड के नाम से जाना जाता है।

खाटू श्याम मंदिर इतना प्रसिद्ध क्यों है?

खाटू श्याम का मंदिर इसलिए प्रसिद्ध है क्योंकि इसे हारे का सहारा बाबा श्याम हमारा कहा जाता है। ये नाम उन्हें ऐसे ही नहीं दिया गया, इस नाम के पीछे एक बड़ी मान्यता है. खाटू श्याम के शीश के बदले में भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें वरदान दिया था कि जो भी खाटू श्याम के दरबार में कुछ भी मांगेगा, उसकी इच्छा पूरी होगी, इसलिए उन्हें इस नाम से बुलाया जाता है, और आजकल यह मंदिर इंस्टाग्राम पर भी बहुत फेमस हो गया तो इसलिए लोगों को यहां जाने की ज्यादा उत्सुकता है।

खाटू मंदिर खुलने का समय

गर्मी के मौसम मेंसर्दी के मौसम में
सुबह- 5:30 AM. से 1:00 p.m. सुबह- 5:30 AM. से 1:00 p.m. 
शाम- 5:00 P.M. से 10:00 p.m. शाम- 4:00 P.M. से 9:00 p.m.

आरती एवं भोग का समय

गर्मियों में समय

  • सुबह की मंगला आरती का समय – 04:30 AM
  • सुबह शृंगार आरती का समय- 7:00 AM
  • सुबह राजभोग का समय- 12:00 PM
  • शाम के आरती का समय- 08:30 PM
  • रात्रि की आरती का समय- 10:00 PM

सर्दियों में समय

  • सुबह की मंगला आरती का समय- 05:30 PM
  • सुबह शृंगार आरती का समय- 08:00 AM
  • सुबह राजभोग का समय- 12:30 AM
  • शाम के आरती का समय- 07:00 PM
  • रात्रि की आरती का समय- 09:00 PM

खाटू बाबा का काटा हुआ सिर अब कहां है ?

हालाँकि खाटू श्याम का सिर चुलकाना धाम में काटा गया था, लेकिन उनका सिर पानी में बहकर राजस्थान पहुँच गया और अब वर्तमान में खाटू बाबा का कटा हुआ सिर राजस्थान के सीकर जिले में है।

खाटू श्याम जी के दादा कौन थे?

खाटू श्याम के दादा का नाम पांडव पुत्र भीम है। खाटू श्याम पांडव पुत्र भीम और हिडिम्बा के पुत्र घटोत्कच के पुत्र थे।

खाटू श्याम का मंदिर कहाँ स्थित है? 

खाटू श्याम का भव्य मंदिर राजस्थान के सीकर जिले में स्थित है।

खाटू श्याम को तीन बाण धारी क्यों कहा जाता है?

खाटू श्याम को तीन बाण वाला कहा जाता है क्योंकि वह शिव के बहुत बड़े भक्त थे और उन्होंने भगवान शिव को प्रसन्न कर उनसे तीन बाण प्राप्त किये थे।

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